आराधना : परमेश्वर की स्तुति, जो कि हमारा चरवाहा है ।
स्तोत्र संहिता 23: 1-6
चरण 1: कहानी पढ़ें
निम्नलिखित पाठ को पढ़ें या सुनें
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23:1याहवेह मेरे चरवाहा हैं, मुझे कोई घटी न होगी.
2वह मुझे हरी-हरी चराइयों में विश्रान्ति प्रदान करते हैं,
वह मुझे शांत स्फूर्ति देनेवाली जलधाराओं के निकट ले जाते हैं.
3वह मेरे प्राण में नवजीवन का संचार करते हैं.
वह अपनी ही महिमा के निमित्त
मुझे धर्म के मार्ग पर लिए चलते हैं.
4यद्यपि मैं भयानक अंधकारमय घाटी
में से होकर आगे बढ़ता हूं,
तौभी मैं किसी बुराई से भयभीत नहीं होता,
क्योंकि आप मेरे साथ होते हैं,
आपकी लाठी और आपकी छड़ी,
मेरे आश्वासन हैं.
5आप मेरे शत्रुओं के सामने
मेरे लिए उत्कृष्ट भोजन परोसते हैं.
आप तेल से मेरे सिर को मला करते हैं;
मेरा प्याला उमड़ रहा है.
6निश्चयतः कुशल मंगल और करुणा-प्रेम
आजीवन मेरे साथ साथ बने रहेंगे,
और मैं सदा-सर्वदा याहवेह के आवास में,
निवास करता रहूंगा.
चरण 2: फिर से वही कहानी दोहराएं
कुछ समय लेकर खुद के शब्दों के कहानी फिर से सुनाएं। बुलंद आवाज़ में बोलें, या लिखें। यदि कहानी याद रखने में आपको कठिनाई हो तो कहानी पुनः पढ़ें या सुनें।
चरण 3: कहानी पर मनन करें
जब आपको लगे कि आप कहानी अच्छे से समझ चुके हैं, तो कुछ समय इसपर मनन चिंतन करें या निम्न प्रश्नों पर चर्चा करें।
यह कहानी आपको परमेश्वर के विषय में क्या बताती है?
यह कहानी आपको मनुष्य के विषय में क्या बताती है?
यदि यह सच में ईश्वर के शब्द हैं, तो आपको आपने जीवन में क्या परिर्वतन करने की अवश्यकता है?