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अध्ययन 7

प्रभु और परमेश्वर के रूप में येशु पर भरोसा करो ।

योहन 20:24-29

चरण 1: कहानी पढ़ें

निम्नलिखित पाठ को पढ़ें या सुनें

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20:24जब मसीह येशु अपने शिष्यों के पास आए थे, उस समय उनके बारह शिष्यों में से एक शिष्य थोमॉस, जिनका उपनाम दिदुमॉस था, वहां नहीं थे. 25अन्य शिष्य उनसे कहते रहे, “हमने प्रभु को देखा है.”

इस पर थोमॉस उनसे बोले, “जब तक मैं उनके हाथों में कीलों के वे चिह्न न देख लूं और कीलों से छिदे उन हाथों में अपनी उंगली और उनकी पसली में अपना हाथ डालकर न देख लूं, तब तक मैं विश्वास कर ही नहीं सकता.”

26आठ दिन के बाद मसीह येशु के शिष्य दोबारा उस कक्ष में इकट्ठा थे और इस समय थोमॉस उनके साथ थे. सारे द्वार बंद होने पर भी मसीह येशु उनके बीच आ खड़े हुए और उनसे कहा, “तुममें शांति बनी रहे.” 27तब उन्होंने थोमॉस की ओर मुख कर कहा, “अपनी उंगली से मेरे हाथों को छूकर देखो और अपना हाथ बढ़ाकर मेरी पसली में डालो; अविश्वासी न रहकर, विश्वासी बनो.”

28थोमॉस बोल उठे, “मेरे प्रभु! मेरे परमेश्वर!”

29मसीह येशु ने उनसे कहा, “तुमने तो विश्वास इसलिये किया है कि तुमने मुझे देख लिया, धन्य हैं वे, जिन्होंने मुझे नहीं देखा फिर भी विश्वास किया.”

चरण 2: फिर से वही कहानी दोहराएं

कुछ समय लेकर खुद के शब्दों के कहानी फिर से सुनाएं। बुलंद आवाज़ में बोलें, या लिखें। यदि कहानी याद रखने में आपको कठिनाई हो तो कहानी पुनः पढ़ें या सुनें।

चरण 3: कहानी पर मनन करें

जब आपको लगे कि आप कहानी अच्छे से समझ चुके हैं, तो कुछ समय इसपर मनन चिंतन करें या निम्न प्रश्नों पर चर्चा करें।


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