खोज करो

अध्ययन 10

खोए हुओं तक पहुँचना (भाग 2)

मत्तियाह 9:35-10:16

चरण 1: कहानी पढ़ें

निम्नलिखित पाठ को पढ़ें या सुनें

x1.0

9:35येशु नगर-नगर और गांव-गांव की यात्रा कर रहे थे. वह उनके यहूदी सभागृहों में शिक्षा देते, स्वर्ग-राज्य के सुसमाचार का प्रचार करते तथा हर एक प्रकार के रोग और दुर्बलताओं को स्वस्थ करते जा रहे थे. 36भीड़ को देख येशु का हृदय करुणा से दुःखित हो उठा क्योंकि वे बिन चरवाहे की भेड़ों के समान व्याकुल और निराश थे. 37इस पर येशु ने अपने शिष्यों से कहा, “उपज तो बहुत है किंतु मज़दूर कम, 38इसलिये उपज के स्वामी से विनती करो कि इस उपज के लिए मज़दूर भेज दें.”

10:1येशु ने अपने बारह शिष्यों को बुलाकर उन्हें अधिकार दिया कि वे दुष्टात्मा को निकाला करें तथा हर एक प्रकार के रोग और बीमारी से स्वस्थ करें.


2इन बारह प्रेरितों के नाम इस प्रकार हैं:

  शिमओन जो पेतरॉस कहलाए, उनके भाई आन्द्रेयास,
  ज़ेबेदियॉस के पुत्र याकोब, उनके भाई योहन,
  3फ़िलिप्पॉस, बारथोलोमेयॉस,
  थोमॉस, चुंगी लेनेवाले मत्तियाह,
  हलफ़ेयॉस के पुत्र याकोब, थद्देइयॉस,
  4कनानी शिमओन तथा कारियोतवासी यहूदाह, जिसने उनके साथ धोखा किया.

5येशु ने इन बारहों को इन निर्देशों के साथ विदा किया: “गैर-यहूदियों के मध्य न जाओ, और शमरिया प्रदेश के किसी भी नगर में प्रवेश न करना. 6परंतु इस्राएल घराने की खोई हुई भेड़ों के पास जाओ. 7जाते हुए यह घोषणा करते जाओ, ‘स्वर्ग-राज्य समीप आ पहुंचा है.’ 8रोगियों को स्वस्थ करो, मरे हुओं को जिलाओ, कोढ़ रोगियों को शुद्ध करो, तथा दुष्टात्मा को निकालते जाओ. तुमने बिना दाम के प्राप्‍त किया है, बिना दाम लिए देते जाओ.

9“यात्रा में अपने लिए सोना, चांदी तथा तांबे के सिक्कों को जमा न करना. 10यात्रा के लिए न थैला, न वस्त्रों के दूसरे जोड़े, न जूते और न ही लाठी साथ ले जाना क्योंकि भरण-पोषण हर एक मज़दूर का अधिकार है. 11किसी भी गांव या नगर में प्रवेश करने पर योग्य व्यक्ति की खोज करना और वहां से विदा होने तक उसी के अतिथि होकर रहना. 12उस घर में प्रवेश करते समय उनके लिए मंगल कामना करना. 13यदि वह घर इस योग्य लगे तो उसके लिए शांति की आशीष देना; यदि वह इसके योग्य न लगे तो अपनी शांति की आशीष अपने पास लौट आने देना. 14जो कोई तुम्हारा स्वागत न करे या तुम्हारी न सुने उस घर से या उस नगर से बाहर आते हुए अपने चरणों की धूल तक वहीं झाड़ देना. 15सच तो यह है कि न्याय-दिवस पर उस नगर की तुलना में सोदोम और गोमोरा का दंड कहीं अधिक सहनीय होगा.

16“याद रखो कि मैं तुम्हें इस प्रकार भेज रहा हूं मानो भेड़ियों के समूह में भेड़. इसलिये ज़रूरी है कि तुम सांप जैसे चालाक तथा कबूतर जैसे भोले हो.

चरण 2: फिर से वही कहानी दोहराएं

कुछ समय लेकर खुद के शब्दों के कहानी फिर से सुनाएं। बुलंद आवाज़ में बोलें, या लिखें। यदि कहानी याद रखने में आपको कठिनाई हो तो कहानी पुनः पढ़ें या सुनें।

चरण 3: कहानी पर मनन करें

जब आपको लगे कि आप कहानी अच्छे से समझ चुके हैं, तो कुछ समय इसपर मनन चिंतन करें या निम्न प्रश्नों पर चर्चा करें।


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