डिस्कवर

सबक़ 2

बपतिस्मा (अबदी वज़ु)

मत्ती 3:13-17, कुलुस्सियों 2:12-12, गलतियों 3:26-29, रोमियों 6:3-8
  1. सब से पहले हम शुरुआत करेंगे कि आज हम किस वजह से अल्लाह का शुक्र अदा करेंगे।
  2. हमारे परिवार, हमारे समाज, या हमारे दोस्तों की ज़िन्दगी में क्या कोई परेशानी हैं जिसके लिये हम आज अल्लाह से दुआ कर सकते हैं?
  3. पीछले बार जो हमने कलाम-ए-मुक़द्दस पढ़ा और सुना, उस हिस्से में से आज हमें कौन सी बात याद है जो सब से ख़ास थी?
  4. पीछले बार जो हमने कलाम-ए-मुक़द्दस सुना, उस हिस्से की जिस आयत को हमने अमल करने के लिए तय किया था तो हमने किस तरह से अमल किया?
  5. पीछले बार जो हमने कलाम-ए-मुक़द्दस सुना, क्या हमने अपने ख़ास तरीक़े के ज़रिए किसी दुसरे शख़्स से इसका ज़िक्र किया? अगर हमने दुसरे लोगों से इसका ज़िक्र किया तो कैसा रहा हमारा तजुर्बा?
  6. अब हम कलाम-ए-मुक़द्दस पढ़ेंगे, सुनेंगे, और समझेंगे।

3:13फिर ईसा गलील से दरियाए-यरदन के किनारे आया ताकि यहया से बपतिस्मा ले। 14लेकिन यहया ने उसे रोकने की कोशिश करके कहा, “मुझे तो आपसे बपतिस्मा लेने की ज़रूरत है, तो फिर आप मेरे पास क्यों आए हैं?”

15ईसा ने जवाब दिया, “अब होने ही दे, क्योंकि मुनासिब है कि हम यह करते हुए अल्लाह की रास्त मरज़ी पूरी करें।”

16बपतिस्मा लेने पर ईसा फ़ौरन पानी से निकला। उसी लमहे आसमान खुल गया और उसने अल्लाह के रूह को देखा जो कबूतर की तरह उतरकर उस पर ठहर गया। 17साथ साथ आसमान से एक आवाज़ सुनाई दी, “यह मेरा प्यारा फ़रज़ंद है, इससे मैं ख़ुश हूँ।”


2:12आपको बपतिस्मा देकर मसीह के साथ दफ़नाया गया और आपको ईमान से ज़िंदा कर दिया गया। क्योंकि आप अल्लाह की क़ुदरत पर ईमान लाए थे, उसी क़ुदरत पर जिसने मसीह को मुरदों में से ज़िंदा कर दिया था।


3:26क्योंकि मसीह ईसा पर ईमान लाने से आप सब अल्लाह के फ़रज़ंद बन गए हैं। 27आपमें से जितनों को मसीह में बपतिस्मा दिया गया उन्होंने मसीह को पहन लिया। 28अब न यहूदी रहा न ग़ैरयहूदी, न ग़ुलाम रहा न आज़ाद, न मर्द रहा न औरत। मसीह ईसा में आप सबके सब एक हैं। 29शर्त यह है कि आप मसीह के हों। तब आप इब्राहीम की औलाद और उन चीज़ों के वारिस हैं जिनका वादा अल्लाह ने किया है।


6:3या क्या आपको मालूम नहीं कि हम सब जिन्हें बपतिस्मा दिया गया है इससे मसीह ईसा की मौत में शामिल हो गए हैं? 4क्योंकि बपतिस्मे से हमें दफ़नाया गया और उस की मौत में शामिल किया गया ताकि हम मसीह की तरह नई ज़िंदगी गुज़ारें, जिसे बाप की जलाली क़ुदरत ने मुरदों में से ज़िंदा किया।

5चूँकि इस तरह हम उस की मौत में उसके साथ पैवस्त हो गए हैं इसलिए हम उसके जी उठने में भी उसके साथ पैवस्त होंगे। 6क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना इनसान मसीह के साथ मसलूब हो गया ताकि गुनाह के क़ब्ज़े में यह जिस्म नेस्त हो जाए और यों हम गुनाह के ग़ुलाम न रहें। 7क्योंकि जो मर गया वह गुनाह से आज़ाद हो गया है। 8और हमारा ईमान है कि चूँकि हम मसीह के साथ मर गए हैं इसलिए हम उसके साथ ज़िंदा भी होंगे,


  1. इस हिस्से में जो कुछ हमने सुना है उसे अपने लफ़्ज़ों में दोहराइए।
  2. इस कलाम-ए-मुक़द्दस के हिस्से में कौन-कौन सी बात हमें अच्छी लगी?
  3. इस हिस्से का क्या क्या अहम सबक़ है?
  4. इस हिस्से में क्या कोई अच्छी मिसाल है, जिसे हमें अपनी ज़िन्दगी में अमल करना चाहिये, या कोई ख़राब मिसाल है जिसे हमें अमल नहीं करना चाहिये?
  5. आने वाले दिनों में हम अपनी ज़िन्दगी में किस तरह से एक ख़ास तरीक़े के ज़रिये इस पर अमल करेंगे?
  6. हमारे इस ख़ास तरीक़े के ज़रिये हम किससे इस हिस्से का ज़िक्र करेंगे?


Get it on Google Play
Download on the App Store

Get Discovery Bible Studies on your phone

Discover copyright ©2015-2026 discoverapp.org

Urdu verses taken from the Urdu Geo Version (UGV) ©2010 Geolink Resource Consultants, LLC 10307 W. Broadstreet, #169, Glen Allen, Virginia 23060, USA. Used with permission. All rights reserved.