डिस्कवर

सबक़ 40

इंजील ए मुक़द्दस मरक़ुस 40

मरक़ुस 16:9-20
  1. सब से पहले हम शुरुआत करेंगे कि आज हम किस वजह से अल्लाह का शुक्र अदा करेंगे।
  2. हमारे परिवार, हमारे समाज, या हमारे दोस्तों की ज़िन्दगी में क्या कोई परेशानी हैं जिसके लिये हम आज अल्लाह से दुआ कर सकते हैं?
  3. पीछले बार जो हमने कलाम-ए-मुक़द्दस पढ़ा और सुना, उस हिस्से में से आज हमें कौन सी बात याद है जो सब से ख़ास थी?
  4. पीछले बार जो हमने कलाम-ए-मुक़द्दस सुना, उस हिस्से की जिस आयत को हमने अमल करने के लिए तय किया था तो हमने किस तरह से अमल किया?
  5. पीछले बार जो हमने कलाम-ए-मुक़द्दस सुना, क्या हमने अपने ख़ास तरीक़े के ज़रिए किसी दुसरे शख़्स से इसका ज़िक्र किया? अगर हमने दुसरे लोगों से इसका ज़िक्र किया तो कैसा रहा हमारा तजुर्बा?
  6. अब हम कलाम-ए-मुक़द्दस पढ़ेंगे, सुनेंगे, और समझेंगे।

16:9जब ईसा इतवार को सुबह-सवेरे जी उठा तो पहला शख़्स जिस पर वह ज़ाहिर हुआ मरियम मग्दलीनी थी जिससे उसने सात बदरूहें निकाली थीं। 10मरियम ईसा के साथियों के पास गई जो मातम कर रहे और रो रहे थे। उसने उन्हें जो कुछ हुआ था बताया। 11लेकिन गो उन्होंने सुना कि ईसा ज़िंदा है और कि मरियम ने उसे देखा है तो भी उन्हें यक़ीन न आया।

12इसके बाद ईसा दूसरी सूरत में उनमें से दो पर ज़ाहिर हुआ जब वह यरूशलम से देहात की तरफ़ पैदल चल रहे थे। 13दोनों ने वापस जाकर यह बात बाक़ी लोगों को बताई। लेकिन उन्हें इनका भी यक़ीन न आया।

14आख़िर में ईसा ग्यारह शागिर्दों पर भी ज़ाहिर हुआ। उस वक़्त वह मेज़ पर बैठे खाना खा रहे थे। उसने उन्हें उनकी बेएतक़ादी और सख़्तदिली के सबब से डाँटा, कि उन्होंने उनका यक़ीन न किया जिन्होंने उसे ज़िंदा देखा था। 15फिर उसने उनसे कहा, “पूरी दुनिया में जाकर तमाम मख़लूक़ात को अल्लाह की ख़ुशख़बरी सुनाओ। 16जो भी ईमान लाकर बपतिस्मा ले उसे नजात मिलेगी। लेकिन जो ईमान न लाए उसे मुजरिम क़रार दिया जाएगा। 17और जहाँ जहाँ लोग ईमान रखेंगे वहाँ यह इलाही निशान ज़ाहिर होंगे : वह मेरे नाम से बदरूहें निकाल देंगे, नई नई ज़बानें बोलेंगे 18और साँपों को उठाकर महफ़ूज़ रहेंगे। मोहलक ज़हर पीने से उन्हें नुक़सान नहीं पहुँचेगा और जब वह अपने हाथ मरीज़ों पर रखेंगे तो शफ़ा पाएँगे।”

19उनसे बात करने के बाद ख़ुदावंद ईसा को आसमान पर उठा लिया गया और वह अल्लाह के दहने हाथ बैठ गया। 20इस पर शागिर्दों ने निकलकर हर जगह मुनादी की। और ख़ुदावंद ने उनकी हिमायत करके इलाही निशानों से कलाम की तसदीक़ की।


  1. इस हिस्से में जो कुछ हमने सुना है उसे अपने लफ़्ज़ों में दोहराइए।
  2. इस कलाम-ए-मुक़द्दस के हिस्से में कौन-कौन सी बात हमें अच्छी लगी?
  3. इस हिस्से का क्या क्या अहम सबक़ है?
  4. इस हिस्से में क्या कोई अच्छी मिसाल है, जिसे हमें अपनी ज़िन्दगी में अमल करना चाहिये, या कोई ख़राब मिसाल है जिसे हमें अमल नहीं करना चाहिये?
  5. आने वाले दिनों में हम अपनी ज़िन्दगी में किस तरह से एक ख़ास तरीक़े के ज़रिये इस पर अमल करेंगे?
  6. हमारे इस ख़ास तरीक़े के ज़रिये हम किससे इस हिस्से का ज़िक्र करेंगे?


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