
26:26खाने के दौरान ईसा ने रोटी लेकर शुक्रगुज़ारी की दुआ की और उसे टुकड़े करके शागिर्दों को दे दिया। उसने कहा, “यह लो और खाओ। यह मेरा बदन है।”
27फिर उसने मै का प्याला लेकर शुक्रगुज़ारी की दुआ की और उसे उन्हें देकर कहा, “तुम सब इसमें से पियो। 28यह मेरा ख़ून है, नए अहद का वह ख़ून जो बहुतों के लिए बहाया जाता है ताकि उनके गुनाहों को मुआफ़ कर दिया जाए। 29मैं तुमको सच बताता हूँ कि अब से मैं अंगूर का यह रस नहीं पियूँगा, क्योंकि अगली दफ़ा इसे तुम्हारे साथ अपने बाप की बादशाही में ही पियूँगा।”
30फिर एक ज़बूर गाकर वह निकले और ज़ैतून के पहाड़ के पास पहुँचे।
11:23क्योंकि जो कुछ मैंने आपके सुपुर्द किया है वह मुझे ख़ुदावंद ही से मिला है। जिस रात ख़ुदावंद ईसा को दुश्मन के हवाले कर दिया गया उसने रोटी लेकर 24शुक्रगुज़ारी की दुआ की और उसे टुकड़े करके कहा, “यह मेरा बदन है जो तुम्हारे लिए दिया जाता है। मुझे याद करने के लिए यही किया करो।” 25इसी तरह उसने खाने के बाद प्याला लेकर कहा, “मै का यह प्याला वह नया अहद है जो मेरे ख़ून के ज़रीए क़ायम किया जाता है। जब कभी इसे पियो तो मुझे याद करने के लिए पियो।” 26क्योंकि जब भी आप यह रोटी खाते और यह प्याला पीते हैं तो ख़ुदावंद की मौत का एलान करते हैं, जब तक वह वापस न आए।
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