
12:15फिर उसने उनसे मज़ीद कहा, “ख़बरदार! हर क़िस्म के लालच से बचे रहना, क्योंकि इनसान की ज़िंदगी उसके मालो-दौलत की कसरत पर मुनहसिर नहीं।”
16उसने उन्हें एक तमसील सुनाई। “किसी अमीर आदमी की ज़मीन में अच्छी फ़सल पैदा हुई। 17चुनाँचे वह सोचने लगा, ‘अब मैं क्या करूँ? मेरे पास तो इतनी जगह नहीं जहाँ मैं सब कुछ जमा करके रखूँ।’ 18फिर उसने कहा, ‘मैं यह करूँगा कि अपने गोदामों को ढाकर इनसे बड़े तामीर करूँगा। उनमें अपना तमाम अनाज और बाक़ी पैदावार जमा कर लूँगा। 19फिर मैं अपने आपसे कहूँगा कि लो, इन अच्छी चीज़ों से तेरी ज़रूरियात बहुत सालों तक पूरी होती रहेंगी। अब आराम कर। खा, पी और ख़ुशी मना।’ 20लेकिन अल्लाह ने उससे कहा, ‘अहमक़! इसी रात तू मर जाएगा। तो फिर जो चीज़ें तूने जमा की हैं वह किसकी होंगी?’
21यही उस शख़्स का अंजाम है जो सिर्फ़ अपने लिए चीज़ें जमा करता है जबकि वह अल्लाह के सामने ग़रीब है।”
8:1भाइयो, हम आपकी तवज्जुह उस फ़ज़ल की तरफ़ दिलाना चाहते हैं जो अल्लाह ने सूबा मकिदुनिया की जमातों पर किया। 2जिस मुसीबत में वह फँसे हुए हैं उससे उनकी सख़्त आज़माइश हुई। तो भी उनकी बेइंतहा ख़ुशी और शदीद ग़ुरबत का नतीजा यह निकला कि उन्होंने बड़ी फ़ैयाज़दिली से हदिया दिया। 3मैं गवाह हूँ कि जितना वह दे सके उतना उन्होंने दे दिया बल्कि इससे भी ज़्यादा। अपनी ही तरफ़ से 4उन्होंने बड़े ज़ोर से हमसे मिन्नत की कि हमें भी यहूदिया के मुक़द्दसीन की ख़िदमत करने का मौक़ा दें, हम भी देने के फ़ज़ल में शरीक होना चाहते हैं। 5और उन्होंने हमारी उम्मीद से कहीं ज़्यादा किया! अल्लाह की मरज़ी से उनका पहला क़दम यह था कि उन्होंने अपने आपको ख़ुदावंद के लिए मख़सूस किया। उनका दूसरा क़दम यह था कि उन्होंने अपने आपको हमारे लिए मख़सूस किया।
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