
| सबक़ 1: |
ईसा मसीह के शागिर्द होने की क़ीमत (मत्ती 16:24-27, लूक़ा 14:26-33) |
| सबक़ 2: |
बपतिस्मा (अबदी वज़ु) (मत्ती 3:13-17, कुलुस्सियों 2:12-12, गलतियों 3:26-29, रोमियों 6:3-8) |
| सबक़ 3: |
तंदरुस्त जमाअत (आमाल 1:1-5, आमाल 2:1-5, आमाल 2:14-14, आमाल 2:36-47) |
| सबक़ 4: |
सताया जाना (मत्ती 5:1-2, मत्ती 5:10-12, यूहन्ना 15:18-21, यूहन्ना 16:1-4, मत्ती 5:43-48) |
| सबक़ 5: |
दरियादिली से देना (लूक़ा 12:15-21, २-कुरिंथियों 8:1-5) |
| सबक़ 6: |
ईसा मसीह को याद करने का तरीक़ा (मत्ती 26:26-30, १-कुरिंथियों 11:23-26) |
| सबक़ 7: |
दुआ (मत्ती 6:7-15, लूक़ा 18:1-8, फ़िलिप्पियों 4:6-7) |
| सबक़ 8: |
एक दूसरे से मुहब्बत रखना (यूहन्ना 13:1-17, यूहन्ना 13:31-15) |
| सबक़ 9: |
असली पड़ोसी (यूहन्ना 4:9-9, लूक़ा 10:25-37) |
| सबक़ 10: |
अल्लाह का कलाम (रोमियों 15:4-4, इबरानियों 4:12-12, २-तीमुथियुस 3:14-17) |
| सबक़ 11: |
इबादत (ज़बूर 68:3-4, ज़बूर 71:19-24) |
| सबक़ 12: |
मोजिज़ात (मत्ती 4:23-24, मत्ती 10:7-8, यूहन्ना 14:12-14) |
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